प्रथम विश्व युद्ध – युद्ध का आर्थिक तथा सामाजिक प्रभाव

प्रथम विश्व युद्ध – युद्ध का आर्थिक तथा सामाजिक प्रभाव

यह त्वपूर्ण कार्य बाल्कन राज्यों ने संगठित होकर, बड़े राज्यों की सहायता के बिना सम्पन्न कर लिया था। इस प्रकार मेसीडोनिया और ईसाई क्षेत्रों की जटिल समस्या बाल्कन राज्यों ने स्वयं हल कर ली। सावया की शक्ति और भात्मविश्वास में वृदि-बुखारेस्ट की सन्धि के द्वारा ज्य का क्षेत्रफल दुगुना हो गया था ।

बाल्कन युद्ध

बाल्कन युद्धों में सर्बिया की शक्ति तथा आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया था । बुखारेस्ट की सन्धि के अवसर पर मी के प्रतिनिधि ने कहा था, “एक बाजी तो हम जीत गये हा अब दूसरी बाजी तैयारी करनी है और वह आस्ट्रिया के साथ होगी। साबया अब लेकर आस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध की बातें करने लगा क्योंकि आस्ट्रिया ने बल्गारिया। साथ दिया था तथा आस्ट्रिया में सर्व लोगों की संख्या भी अधिक थी। सर्विया । रूस का वरदहस्त भी प्राप्त था | सर्विया की बढ़ती हुई शक्ति से आस्ट्रिया चिनि था । सर्बिया के वृहत् सर्बिया (Greater Serbia) आन्दोलन के कारण आस्ट्रिया । आन्तरिक एवं बाहरी कठिनाईयाँ बढ़ती जा रही थी।

(vi) बाल्कन राज्यों के बीच पारस्परिक ईर्ष्या –

यद्यपि दोनों बाल्कन युद्धों है फलस्वरुप सर्बिया, बल्गारिया, यूनान, कमानिया और मान्टीनीग्रो के राज्यों है भू-भागों में काफी वृद्धि हुई थी, किन्तु पूर्वी समस्या का कोई स्थायी समाधान नई हँदा गया । द्वितीय बाल्कन युद्ध के फलस्वरूप विभिन्न बाल्कन राज्यों के बीर पारस्परिक ईर्ष्या और देष में वृद्धि हो गयी थी । बल्गारिया अपने पड़ोसियों । बहुत चिढ़ गया क्योंकि उन्होंने उसे, उसकी उचित माँग से वंचित कर दिया था। रूस एक बार फिर बाल्कन राज्यों का संरक्षक बना और अब वह सर्बिया क समर्थन कर आस्ट्रिया का विरोधी बन गया । बाल्कन के सभी राज्य अपना-अपना विस्तार करना चाहते थे । अतः बाल्कन की समस्या और अधिक पेचीदा हो गयी।

बाल्कन युद्धों तथा उनके प्रभावों पर ग्राण्ट एवं टेम्परले ने लिखा है कि “1912-13 ई० के बाल्कन युद्धों तथा उनके प्रभावों पर सबसे अच्छी राय यही है कि युदरत राष्ट्रों में से किसी को भी, चाहे वह विजयी रहा हो या पराजित हुज हो, यह विश्वास नहीं था कि उसके क्षेत्रीय निर्णय स्थायी होंगे।” विजयी सर्व और मान्टीनोग्रो समझते थे कि उन्हें अपनी विजय के बाद आस्ट्रिया-हंगरी का सामना करना पड़ेगा । पराजित बल्गार, आस्ट्रिया और तुर्की से मित्रता करके वे अपने पहले के मित्रों से बदला लेना चाहते थे। ये सभी शीघ्र ही युद्ध की आशा करते थे। और 1913 ई० में की गई संधि को एक रद्दी का टुकड़ा समझते थे।

ड्युक फ्रांसिस फर्डिनेण्ड की हत्या

निःसंदेह बाल्कन युद्धों के फलस्वरूप न केवल बाल्कन प्रायद्वीप का नक्शा बदल गया बल्कि प्रथम विश्व युद्ध के लिए विस्फोटक परिस्थितियाँ भी बन गई । अब केवल एक चिनगारी द्वारा यह विस्फोट हो सकता था । ग्यारह माह बाद यूरोप देशों को उपयुक्त अवसर और बहाना मिल गया । 28 जून, 1914 को बोस्निया के राजधानी सिराजिवो में आस्ट्रिया के युवराज आर्क ड्युक फ्रांसिस फर्डिनेण्ड की हत्या हो गयी । बोस्निया, आस्ट्रिया के साम्राज्य में था और हत्यारा सर्व होते हुए बाष्ट्रिया की प्रजा था । फिर भी आस्ट्रिया ने इस हत्या का दोष सर्बिया पर लगाया और उसे 48 घण्टे में कुछ अत्यन्त अपमानजनक शतों को स्वीकार करने को कर गया ! सर्विया ने अधिकांशं शतों को स्वीकार कर लिया और दो शतों को यह का कर मानने से इन्कार कर दिया कि इससे उसकी संप्रभुता को चुनौती पहुंचेगी। आस्ट्रिया को इससे सन्तोष नहीं हुआ और उसने 28 जुलाई, 1914 को सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी । रुस ने इस प्रश्न को यूरोपीय राज्यों के सम्मुख रखने का प्रस्ताव किया और आस्ट्रिया के विरोध करने पर अपनी सेनाएँ सीमा की ओर भेजने का आदेश दिया। इस पर जर्मनी ने रूस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी । इस प्रकार यूरोपीय महायुद्ध आरम्भ हो गया।

जर्मनी की रूस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा

1. मेरियट, जे० ए० आर०: दि ईस्टर्न क्वेश्चन, पृ० 10

2. The Near Eastern Question may be defined as the problems of filling up the Vacuum created by the gradual disappearence of the Turkish Empire from
Europe.

3. एलीसन फिलिप्स : मार्डन यूरोप (1815-1899), पृ. 139

4. मेरियट, जे० ए० बार० : दि ईस्टर्न क्वेश्चन, पृ० 231

5. प्रांट एण्ड टेम्परले : यूरोप इन दि नाइन्टीन्य एण्ड ट्वन्टियथ सेंचुरीज, पृ० 200

6. मेरियट, जे० ए० आर०: दि ईस्टर्न क्वेश्चन, पृ० 236

7. “The Question was whether, for the purpose of Passing through the building into their grotto, the Latin monks should have the key of the chief door of the church of Bethlehem, and also one of the keys of each of the two doors of the sacred manger, and whether they should be at liberty to place in the sanctuary of Nativity a silver star adorned with the arms of France Quoted from The Eastern Question : Marriott.J.A.R.

8. मेरियट जे. ए. आर : दि ईस्टर्न क्वेश्चन, पृ० 256 १. मेरियट, जे०ए० आर : दी ईस्टर्न क्वेश्चन, पृ० 264

10. ग्राण्ट एण्ड टेम्परले : यूरोप इन दि नाइन्टीन्थ एण्ड ट्वन्टियथ सेंचुरीज, पृ. 217-18

11. टेलर ए. जे. पी. : दी स्ट्रगल फार मास्ट्री इन यूरोप (1848-1918), पृ० ० 12. केटलबी, सी० डी० एम० : ए हिस्ट्री आफ मॉडर्न टाइम्स, पृ० 221

13. डेविड टामसन : यूरोप सिस नेपोलियन, पृ० 2m

14. ग्रान्ट एण्ड टेम्परले : यूरोप इन दि नाइन्टीन्य एण्ड टवन्टियथ सेंचुरीज, पृ० 208 15. मेरियट :दी ईस्टर्न क्वेश्चन, पृ० 321 से उद्धत

16. सैगर : यूरोपीय एलायेसेज एण्ड एलाइनमन्टटस, पृ० 69

17. सेंगर : यूरोपियन एलायेंसेज एण्ड एलाइनमेंटस, पृ. 75

18, टेलर : दि स्ट्रगिल फार मास्ट्री इन यूरोप, पृ. 242-243 19. लेंगर : वही, पृ. 123

20. मेरियट : दि ईस्टर्न क्वेश्चन, पृ० 342 21. लेंगर : यूरोपियन एलायेंसेज एण्ड एलाइनमेंट्स, पृ. 162

22. सेंगर : वही, पृ. 153 से उदत 23. सेंगर: बही, पृ. 161 24. फे० एस०पी० : दि गोरिजिन्स गॉफ दि वल्ड बार, पृ. 427

25.1389 को कोसोवा का पुर बाल्कन राज्यों के इतिहास में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इस युद्ध में तुर्की ने सर्विया की शक्ति को नष्ट कर दिया था।

26. मेरियट : बही, पृ०466 27. टेलर : बही, पृ. 49

प्रथम विश्व युद्ध – युद्ध का आर्थिक तथा सामाजिक प्रभाव, पेरिस सन्धि-1919 (The First World War-The Economic and Social impact of the War-The Peace of Paris-1919)

“युद्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण गुप्त समझौता प्रणाली थी जिसका विकास फ्रांस और प्रशा के युद्ध के बाद हुआ था। इसने धीरे-धीरे यूरोप की शक्तियों को ऐसे दो विरोधी गुटों में बाँट दिया, जिसने एक दूसरे के प्रति सन्देह बढ़ता रहा और जो अपनी बल-सेना एवं नौ-सेना की शक्ति बढ़ाते रहे।”

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