माध्यमिक शिक्षा आयोग द्वारा माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम के विषय में क्या सिफारिशें की?

माध्यमिक शिक्षा आयोग द्वारा माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम के विषय में क्या सिफारिशें की?

7. स्वास्थ्यवर्द्धक स्थानों, शिविरों, शिक्षा- सम्मेलनों, सेमीनारों आदि में जाने के लिए किराए में रियायत और छुट्टी दी जानी चाहिए ।
8. यथासम्भव सभी विद्यालयों में शिक्षकों को छुट्टी देने के नियम एक से होने चाहिए ।
9. उनको स्वदेश या विदेश में उच्च अध्ययन के लिए अध्ययन-अवकाश दिया जाना चाहिए।
10. शिक्षकों द्वारा ट्यूशन पढ़ाने की प्रथा समाप्त कर दी जानी चाहिए ।
11. यदि शिक्षक स्वस्थ और कार्य करने के योग्य है तो शिक्षा संचालक की अनुमति से उसको 60 वर्ष की अवस्था तक कार्य करने की आज्ञा दी जानी चाहिए |
12. योग्य और उचित प्रकार के व्यक्तियों को इस पुनीत व्यवसाय के प्रति आकर्षित करने के लिए अध्यापकों एवं प्रधानाध्यापकों को उच्च वेतन और आर्थिक सुविधाएँ दी जानी चाहिए |

आज के शिक्षक की वर्तमान असंतुष्ट मनोदशा, हताशा की स्थिति एवं दशा बड़ी चिन्ताजनक है, इस ओर आयोग ने ध्यान दिया है तथा उनकी स्थिति सुधारने का प्रयास किया है । अत: आयोग ने अध्यापकों के विकास के लिए पर्याप्त एवं उपयोगी सुझाव दिये हैं ।

15.9.11 अध्यापक प्रशिक्षण

आयोग अध्यापकों के प्रशिक्षण की तत्कालीन व्यवस्था से भी संतुष्ट नहीं था, अत: उसने अध्यापक – प्रशिक्षण के बारे में निम्नांकित मत व्यक्त किये
1. प्रशिक्षण विद्यालय दो प्रकार के होने चाहिए
(क) प्रथम उनके लिए जो उच्चतर माध्यमिक शिक्षा प्राप्त है, इनका प्रशिक्षण काल दो वर्ष होना चाहिए ।
(ख) वितीय उनके लिए जो स्नातक है । इनका प्रशिक्षण काल इस समय 1 वर्ष रहे, परन्तु कुछ समय बाद 2 वर्ष कर दिया जाना चाहिए ।
2. प्रथम प्रकार के प्रशिक्षण- विद्यालय एक बोर्ड के अधीन रखे जाने चाहिए, जिसकी नियुक्ति इसी उद्देश्य के लिए की जानी चाहिए ।
स्नातकों के प्रशिक्षण- महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों के अधीन एवं उनसे सम्बद्ध रखा जाना चाहिए ।
3. प्रशिक्षण कॉलेजों में अभिनन्दन पाठ्यक्रमों और कार्यशाला में व्यावहारिक प्रशिक्षण की
व्यवस्था की जानी चाहिए ।
4. प्रशिक्षण- विद्यालयों में छात्राध्यापकों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। सभी छात्राध्यापकों को राज्य की ओर से उपयुक्त शिष्य-वृतियाँ दी जानी चाहिए। जो शिक्षक किसी स्कूल में कार्य कर रहे हों, उन्हें प्रशिक्षण काल के लिए पूर्ण वेतन दर पर छुटटी दी जानी चाहिए ।
5. सभी प्रशिक्षण विद्यालयों में छात्राध्यापकों के लिए रहने की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे उनके लिए सामुदायिक जीवन और अन्य उपयुक्त क्रियाओं की व्यवस्था की जा सके |
6. शिक्षा स्नातकोत्तर में केवल उन प्रशिक्षित स्नातकों को प्रवेश दिया जाना चाहिए, जो कम से कम 3 वर्ष किसी विद्यालय में अध्यापन कार्य कर चुके है ।
7. छात्राध्यापकों को एक या अधिक अतिरिक्त पाठ्यक्रियाओं में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए |
8. ट्रेनिंग कॉलेजों के प्रोफेसरों, स्कूलों के चुने हुए हेडमास्टरों और विद्यालय निरीक्षकों में विचारों का आदान प्रदान स्वतंत्रतापूर्वक होना चाहिए ।

15.9.12 प्रशासन की समस्याएँ

आयोग ने माध्यमिक शिक्षा से सम्बन्धित सभी समस्याओं का अध्ययन कर उनके समाधान के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये
(अ) संगठन और प्रशासन
1. प्रशासन की समस्याओं पर शिक्षा मंत्री को परामर्श देने का उतरदायित्व शिक्षा संचालक पर होना चाहिए | अत: इस कार्य के लिए शिक्षा मंत्री तक उसकी सीधी पहुंच होनी चाहिए और उसका पद संयुक्त शिक्षा सचिव के समकक्ष होना चाहिए ।
2. केन्द्र और राज्यों में एक समिति का निर्माण किया जाना चाहिए जो शिक्षा सम्बन्धी मामलों पर विचार करके उपयुक्त योजनाएँ बनायें ।
3. शिक्षा के सभी क्षेत्रों में विस्तार और सुधार के उपायों पर विचार करने के लिए समन्वय समिति की नियुक्ति की जानी चाहिए, जिसमें शिक्षा के सभी विभागों के अध्यक्ष होने चाहिए |
4. शिक्षक प्रशिक्षण परिषद् की स्थापना की जानी चाहिए, जो पूर्व स्नातक अध्यापकों के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था करे ।।
5. वर्तमान केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की शिक्षा से संबंधित अखिल भारतीय समस्याओं के समाधान में समन्वयकारी साधन के रूप में कार्य करना चाहिए ।
6. प्रत्येक राज्य में शिक्षण विभाग को परामर्श देने के लिए राज्य सलाहकार बोर्ड की स्थापना की जानी चाहिए ।

विद्यालयों का निरीक्षण

1. विद्यालय निरीक्षकों को स्कूल की समस्याओं का अध्ययन करना, उसमें सुधार करने के लिए सुझाव देना और समय-समय पर अध्यापकों को शिक्षण कार्य के सम्बन्ध में परामर्श देना चाहिए |
2. गृह विज्ञान, कला, संगीत आदि जैसे विशेष विषयों की शिक्षा का निरीक्षण करने के लिए विशेष निरीक्षण या निरीक्षकों के बोर्ड की नियुक्ति की जानी चाहिए ।
3. जिन व्यक्तियों को निरीक्षण पद के लिए चुना जाए उनमें उच्च शैक्षिक योग्यता, शिक्षण अनुभव या हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कार्य करने का अनुभव होना चाहिए ।
4. विद्यालय निरीक्षक प्रशासन के कार्य में सहायता देने योग्य व्यक्ति होने चाहिए ।

(स) विद्यालयों की प्रबन्ध समितियाँ व मान्यता

1. विद्यालयों को मान्यता तभी दी जाए, जब वे मान्यता की सब शर्तों को पूरा कर दें ।
2. मान्यता प्राप्त विद्यालय का संचालन सरकार से स्वीकृत प्रबन्धकारिणी समिति द्वारा | किया जाए। सदस्यों की संख्या सीमित रखी जाए और उनमें विद्यालय के प्रधानाध्यापक को स्थान दिया जाए।
3. प्रबन्ध समिति के किसी सदस्य को विद्यालय के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने दिया जाए।
4. प्रत्येक प्रबन्ध समिति को सेवा सम्बन्धी निश्चित नियमों को बनाने का आदेश दिया जाए । इन नियमों में शिक्षकों की नियुक्ति, वेतन, छुट्टी आदि के नियमों को स्थान दिया जाए ।
5. प्रबन्ध समितियाँ शुल्क की जिन दरों को अपने स्कूलों के लिए निश्चित करें, उनकी स्वीकृति शिक्षा विभाग से अवश्य ली जाए ।
6. किसी कक्षा में यदि कोई और खण्ड बढ़ाया जाए तो उसके लिए शिक्षा विभाग से अनुमति ली जाए।
7. शिक्षकों को किसी विशेष जाति या समुदाय तक सीमित न रखा जाए, वरन् इनकी नियुक्ति एक विस्तृत आधार पर की जाए ।

(द) भवन और साज-सज्जा

1. ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना ऐसे स्थानों पर ही की जाए, जहां आस पास के गांवों के बालक सरलता से जा सकें ।
2. शहरी क्षेत्रों में विद्यालय ऐसे स्थानों पर स्थापित किये जायें, जहाँ शोरगुल और भीड़भाड़ न हो, पर जहाँ पहुंचने के लिए यातायात की उपयुक्त सुविधाएँ अवश्य हो ।
3. विद्यालय भवनों का निर्माण करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि कमरों में प्रत्येक छात्र के लिए 10 वर्गफुट जगह अवश्य हों ।
4. प्रत्येक कक्षा में कम से कम 30 और अधिक से अधिक 40 छात्रों को प्रवेश दिया जाए ।

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