प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था ?

प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था ?

प्रत्येक देश अपने को सर्वाधिकार सम्पन्न देश मानकर अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिज्ञामा क प्रात अवहेलना का रुख अपनाया करते थे। गुप्त कूटनीतिक पद्धति के कारण किसी भी राज्य की जनता अथवा प्रतिाना सभा को यह जानकारी नहीं होती थी कि उनके मन्त्रियों या राजदूतों ने किस के साथ किस प्रकार का समझौता किया है। जैसे सर एडवर्ड ग्रे ने 1905६०१ फ्रांस और इंग्लैण्ड में सैनिक तैयारियों के विषय में वार्ता की अनुमति दी थी, किन्तु मान्त्रमण्डल को इस विषय में 1912 ई० में और संसद को 1914३० म बताया  गया था फिर भी युड आरम्भ होने के पहले फ्रांस को दिये गये मारवासनों के मैं हाउस ऑफ कॉमन्स को कुछ भी नहीं बताया गया था ।

फ्रांस और इंग्लैण्ड में सैनिक तैयारियों

इसी प्रकार मी त्रिगट का सदस्य था, फिर भी उसने 1902 ई० में फ्रांस से और 1909 ई० सस से पृथक गुप्त सन्धियों कर ली । उस पर ऐसी सन्धियाँ न करने के लिए बल डालने वाली कोई संस्था नहीं थी और यदि ऐसी कोई संस्था होती तो गुप्त मावि की जानकारी होती यह आवश्यक नहीं है । अतः किसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्था के अभाव में किसी भी देश पर कोई अंकुश नहीं था और सभी देश अपनी इच्छानुसार उचित या अनुचित कार्य करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र थे।

प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण-

आस्ट्रिया और सर्बिया के सम्बन्ध 1908 ई० से ही बिगड़े हुए थे; जो 1914 ई० तक अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुके थे । सर्बिया के कुछ उग्र राष्ट्रवादियों ने सर्व-स्लाव आन्दोलन के प्रभाव में आकर स्लावों की मुक्ति के लिए अनेक गुप्त संस्थाएँ बनायी थी । इनमें एक संस्था ‘काला हाथ’ (Black Hand) भी थी । इस संस्था ने संगठन या मृत्यु (Union or Death) नामक दूसरी संस्था से मिलकर बोस्निया के गवर्नर पोटियोरके की हत्या की योजना बनाई। किन्तु इसी समय उन्हें यह पता चला कि आस्ट्रिया का युवराज फर्डिनेण्ड बोस्निया की सरकारी यात्रा पर आने वाला है, तो उन्होंने युवराज की हत्या का षड्यन्त्र रचा। सर्बिया की सरकार के उच्च अधिकारियों ने उन व्यक्तियों को हथियार और गोला-बारुद्ध दिये और उन्हें बोस्निया की सीमा में प्रविष्ट कराने का प्रवन्ध भी किया । युवराज की यात्रा का मुख्य उद्देश्य बोस्निया में स्थित 15वीं एवं 16वीं सेना का वार्षिक निरीक्षण करना था | इसी सूचना के आधार पर षड्यन्त्रकारियों ने इत्या की योजना बनायी | आर्क ड्यूक और उसकी पत्नी 28 जून, 1914 को बोस्निया के प्रमुख शहर सेराजिवो गये । दुर्भाग्य से यह दिन सर्बिया के लिए शोक दिवस था । जब शाही दल सेराजिवो के टाउन हाल की ओर जा रहा था तभी एक षड्यन्त्रकारी गेवरीलो प्रिन्सिप ने दो गोलियां चलाई जिससे युवराज फर्डिनेण्ड तथा उसकी पत्नी सोफी (Sophie) मारी गयी । इस घटना ने यूरोप को युद्ध की ज्वाला में ढकेल दिया।

आस्ट्रिया में हत्या की प्रतिक्रिया-

युवराज की हत्या का समाचार आस्ट्रिया पहुचत ही वहाँ क्रोध की लहर उत्पन्न हुई। सरकार ने इसके लिए सर्बिया को दोषी माना | आस्ट्रिया के विदेश मंत्री बर्चटोल (Berchtold) ने सर्बिया के विरुद्ध कठोर कायवाही करने का निश्चय किया। डा. बीजनर को युवराज की हत्या की जाँच का काय सौपा गया था, किन्तु डॉ. वीजनर ने अपनी रिपोर्ट में कहा- इस हत्या में साया की सरकार का शामिल होना नितान्त असम्भाव्य है। यह सत्य है कि सबिया में वर्षों से एक प्रभावशाली समिति (NaroOdbrana) समस्त सर्व लोगों राजनीतिक एकता के लिए प्रयत्न कर रही थी । यहाँ एक गुप्त आतंकवादी अपार कर रहा था जिसका तास रान या मृत्यु था और जो प्राय इत्या किया करता था।

आस्ट्रिया और सर्बिया के सम्बन्ध

सनिया की सरकार उसले अप्रसा थी और उससे भय या के रूसी रसके कारण सादिया के युद्ध त कि जायावियना में नियुक्त सर्बिया के रणपूर के सादिया के अधिकारियों को सूचना भी दी थी कि यदि युवराज को पद से उनके संकट में पड़ जाने का डर है, फिर भी उनकी सुरक्षा के आदेश का प्रसार सेनापति कोनराज (ConVed) भी सविया को इस हत्या के एस अफस थी और उसके विरुद्ध युद्ध करना चाहता था क्योंकि सम्राट कि गोरा दिया है युद्ध के एक से नहीं था तथा उसको भय था कि सर्बिया के पि इस करते है है भी युद्ध करना पड़ सकता है। हेगरी के प्रधानमन्त्री का ( के भी विधा के विरुव युद्ध का विरोध किया था।

आदया जाए सविधा को अदालेद-

आस्ट्रिया जर्मनी के समर्थन के बिना साया के इस करने का सत्ता सही डा सकता था । अतः आस्ट्रिया के विदेशमंत्री रोक के स्वाद कार की ओर से जहन समाद को पत्र लिखकर आस्ट्रिया की सोले सदको स्था नदी के योग का अनुरोध किया । जर्मनी में 5 जुलाई को आया की सरकार को एपित किया कि विधा के सम्बन्ध में वह जो भी निर्णय करवा इसका उमदी पूर्ण रूप से समर्थन करेगा। इस समर्थन को जर्मनी द्वारा जादया को कोए रेक (Slant cheque) देता माना गया । अतः आस्ट्रिया की सरकार के जुलाई को सविधा को अल्टीमेटम दिया जिससे उसकी शतों को 48 कटे की अपाचे हे भादले को कहा गया ।

अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का विफल रहना

आस्ट्रिया से अपनी चेतावनी में सबिया रए मर के समहति का उल्लंघन करने तथा आस्ट्रिया विरोधी प्रचार को बोल्साहित करते और हत्या के बड्यन्त की जानकारी होते हुए भी उसे न रोकने और हत्या के बाद रयत्लकारियों को स्थापित इण्ड र देने का आरोप लगाया। इह शादी के सदई में सर्विया की सरकार से अधिकांश शतों को स्वीकार कर किया एतु से गले जिहरे आलिया के अधिकारियों द्वारा सर्विया में जाँच रमाक के भाग होते की मांग भी सम्मिलित भो, मानने से इन्कार कर दिया क्योकि इसके सामने है उसको प्रभुसत्ता और सम्मान को देख पहुंचती थी. इन शर्तों के सत्वचा में हरिया के देश के अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा जो भी निर्णय हो उस स्वीकार करने की बात कही। सूरोष के सभी देशों में सर्बिया के उत्तर के हासोपालक का । जोक हाद कैशर विलियम से भी लिजामा-“आस्ट्रिया की साराभण रूबी इमाएं पूरी हो गई, जो बोकी ही बातें शेष रह गई, उन्हें बातचीत द्वार रूर किया जा सकता है। सर्विया का उत्तर एक बहुत ही अपमानजनक आमहडपोण का इलीक है और उसके बाद पुड के लिए तनिक भी आधार नहीए जाता किन्तु आलिया का विदेश मंत्री इस समय तक युद्ध करने का निर का था, अतः उसने सबिया के उत्तर को असन्तोषजनक मानकर अस्वीकार कर दिया और 28 जुलाई, 1914 को सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। मार्बिया ने स्वयं भी युद्ध का स्वागत किया और अपना उत्तर भेजने से पहले ही उसने सार्वजनिक लामबन्दी (General Mobilization) की आज्ञा दे दी।

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