बाल्कन युद्धों के क्या परिणाम हुए ?

बाल्कन युद्धों के क्या परिणाम हुए ?

30 मई, 1913 की लन्दन की सन्धि में निम्नलिखित निर्णय किये गये –

(1) तुर्की ने कालेसागर स्थित मीडिया से लेकर एजियन सागर पर स्थित एनोस के पश्चिम का सम्पूर्ण क्षेत्र और क्रीट का द्वीप बाल्कन राज्यों को देना स्वीकार किया ।

(2) यूनान को दक्षिणी मेसीडोनिया और क्रीट का द्वीप मिला, सर्बिया को उत्तरी और मध्य मेसीडोनिया का क्षेत्र प्राप्त हुआ तथा बल्गारिया को प्रेस एवं एजियन सागर का तटवर्ती भाग प्राप्त हुआ।

(3) अल्बानिया का स्वतन्त्र राज्य स्थापित किया गया किन्तु उसकी सीमाएँ निश्चित करने का कार्य भविष्य के लिए छोड़ दिया गया ।

लन्दन की सन्धि

इस प्रकार प्रयम बाल्कन युद्ध का अन्त हुआ | इस सन्धि को अन्तिम रुप से स्वीकार कराने में, विभिन्न राज्यों की परस्पर विरोधी माँगों ओर विशेष रुप से आस्ट्रिया और रुस के परस्पर विरोधी हितों के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा किन्तु इंग्लैण्ड और जर्मनी के सहयोग से युद्ध की स्थिति टल गई और । समझौता हो गया।

द्वितीय बाल्कन युद्ध –

लन्दन की सन्धि के पश्चात् बाल्कन प्रदेश में अधिक समय तक शान्ति स्थापित नहीं हो सकी । बाल्कन के राज्य सन्धि द्वारा किये गये बंटवारे स सन्तुष्ट नहीं थे | इनके झगड़े का मुख्य कारण मेसीडोनिया का राज्य था। जिसम यूनानी, स्लाव तथा बलार आदि जाति के लोग निवास करते थे । यूनान सास्कृतिक तथा प्राचीन ऐतिहासिक सम्बन्धों के कारण उसे अपने राज्य में मिलना पाहता था । सर्विया अल्बानिया के बदले में उसकी मांग कर रहा था । बल्गारिया का कहना था कि मेसीडोनिया के निवासी अधिकतर बल्गार थे, अतः इजियन कतट पर उसका विस्तार अत्यन्त आवश्यक था और सेन स्टीफना की सति अनुसार एक बार यह प्रदेश उसे प्राप्त हो चुका था। अतः वह मेसीडोनिया को आधकार में रखने की बात पर अड़ गया | आस्ट्रिया भी गुप्त रुप से उसे प्रोत्साहित कर रहा था ।

मेसीडोनिया के अधिकांश भाग में यूनान तथा सकि सेनाएं उपस्थित थी। उन्होंने बल्गारिया के आक्रमण से उसकी रक्षा करने का आपस में गुप्त समझौता कर लिया। रूस ने मध्यस्थ बनकर झगड़ा निपटाने प्रस्ताव किया । सर्बिया तो इस बात के लिए तैयार था, किन्तु बल्गारिया ने। शर्ते प्रस्तुत की । वास्तव में बल्गारिया अपनी इच्छानुसार बटवारा करना चार था । उसने उन्हें आसानी से परास्त कर सकने की आशा से बिना युद्ध की घोक किये ही अचानक सर्बिया और यूनान पर आक्रमण कर दिया । यह उसकी मुल। क्योंकि बल्गारिया का दावा सर्बिया के दावे से मजबूत था। उसने युद्ध छेदक अपने दावे को कमजोर बना लिया, इससे मान्टीनीग्रो तथा रुमानिया भी सर्विया । साथ सम्मिलित हो गये ओर तुर्की भी कुछ क्षतिपूर्ति की आशा से उसकी ओर मि. गया । बल्गारिया अब अकेला था । युद्ध में वह बुरी तरह परास्त हुआ और उस सन्धि हुई। सन्धि करने के लिए मजबूर होना पड़ा । अन्ततः अगस्त, 1913 में बुखारेस्ट के

बुखारेस्ट की सन्धि –

बुखारेस्ट की सन्धि के अनुसार बल्गारिया को प्रथम बाल्क युद्ध में जीता हुआ बहुत-सा भाग तथा अपने राज्य का कुछ भाग विजयी बाल्कर के राज्यों को देना पड़ा।

(i) बल्गेरिया ने रुमानिया को डोबुजा का बहुत बड़ा भाग, जिसमें सिलिस्ट्रिया क दुर्ग था, दे दिया।

(ii) सर्बिया को आचरीडा, उमोनस्टिर और कोसोवो सहित मध्य मेसीडोनिया और नोवीबाजार के संजक का पूर्वी भाग प्राप्त हुआ। (i) यूनान को एपीरस, दक्षिणी मेसीडोनिया, सेलोनिका और कावला सहित मेटा नदी तक का समुद्र तट प्रदान किया गया ।

(iv) तुर्की को एड्रियानोपल और ग्रेस का कुछ भाग प्राप्त हुआ।

(V) मान्टीनोग्रो को नोवीबाजार का पश्चिमी भाग दिया गया जिससे उसका आकार लगभग दुगुना हो गया।

(vi) बल्गारिया को मेसीडोनिया में 9000 वर्ग मील का भू-भाग प्राप्त हुआ आ उसके साथ ही उसकी जनसंख्या में एक लाख पच्चीस हजार व्यक्तियों की प्रतिभा इस प्रकार बुखारेस्ट की सन्धि के परिणामस्वरुप बल्गारिया को मेसीडोनिया 2 बहुत बड़ा भू-भाग छोड़ना पड़ा और वृहत् बल्गारिया के निर्माण का स्वप्न छोड़ना पड़ा। इसके अतिरिक्त 10 लाख से अधिक बल्गार जाति के लोगों को विदशा के अन्तर्गत जाना पड़ा। इस सन्धि ने यह प्रमाणित कर दिया कि बाल्कन वास्तव में स्वतन्त्र हो गये थे।

बाल्कन युद्धों के परिणाम –

धन-जन की अपार हानि –

सन् 1912-13 के बाल्कन युद्धों में अपार जन-जन की हानि हुई । मेरियट के अनुसार दोनों बाल्कन युद्धों में लगभग 24 करोड़ 50 लाख पौण्ड खर्च हुए तथा 3 लाख 48 हजार व्यक्ति मारे गये अथवा घायल हुए । बल्गारिया को सबसे अधिक हानि हुई क्योंकि उसके 1 लाख 40 हजार सैनिक मारे गये और 9 करोड़ पौण्ड युद्ध पर खर्च हुए | इसी प्रकार तुकों के भी एक लाख सैनिक मारे गए और 80 लाख पौण्ड युद्ध पर खर्च हुए 26

(I) यूरोप में तुर्की साम्राज्य का विनाश

बाल्कन युद्धों का सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम यह हुआ कि यूरोप में तुर्की का साम्राज्य नष्टप्रायः हो गया । टेलर ने लिखा है – तुर्की के पास केवल कुस्तुन्तुनिया, एड्रियानोपल, डार्डेनल्स और बासफोरस ही रह गये थे । अब तुर्की एशियाई राष्ट्र रह गया था और ये उसके बाहरी भाग थे । अपने यूरोपीय साम्राज्य का 5/6 भाग उससे छीन लिया गया था और 2/3 यूरोपीय प्रजा उससे अलग हो गयी थी 27

(III) बाल्कन के राज्यों का विस्तार-

बाल्कान युद्धों के फलस्वरुप यूनान, सर्बिया, रुमानिया, मान्टीनीग्रो एवं बल्गारिया के राज्यों का बहुत अधिक विस्तार हो गया । यूनान को सबसे अधिक भू-भाग प्राप्त हुआ । उसके राज्य का क्षेत्रफल 25,014 वर्गमील से बढ़कर 41,933 वर्गमील हो गया । सर्बिया के राज्य का क्षेत्रफल लगभग दुगुना हो गया । रुमानिया ने केवल द्वितीय बाल्कन युद्ध में भाग लिया था, फिर भी उसको बल्गारिया से 2700 वर्गमील का भू-भाग प्राप्त हो गया था । मान्टीनीग्रो को भी लगभग 1100 वर्गमील का क्षेत्रफल प्राप्त हुआ। बुखारेस्ट की सन्धि के बाद बल्गारिया के पास लगभग 9650 वर्गमील का अतिरिक्त भू-भाग था। किन्तु कोई भी बाल्कन राज्य इस लाभ से पूर्णतः सन्तुष्ट नहीं था । प्रत्येक राज्य की महत्त्वाकांक्षा और अधिक भू-भाग प्राप्त करने की थी।

(iv) बाल्कन क्षेत्र के ईसाइयों की मुक्ति-

बाल्कन के युद्धों का एक महत्त्वपूर्ण परिणाम यह भी हुआ कि तुर्की के अत्याचारी शासन से वहाँ के ईसाइयों को मुक्ति प्राप्त हुई थी । ये ईसाई पाँच शताब्दियों से तुर्की के अत्याचारपूर्ण एवं शोषणकारी शासन के अन्तर्गत दयनीय जीवन व्यतीत कर रहे थे । यद्यपि तुर्की के सुल्तानों ने पूरापाय राज्यों के दबाव के कारण कई बार ईसाइयों को नागरिक अधिकार देने का वचन दिया था, किन्तु कभी भी इसे क्रियान्वित नहीं किया गया।

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